Protest Against Automated SlaughterHouses
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कु.मायावती, मुख्यमंत्री, उत्तरप्रदेश
माननीय महोदया,
समाचारों में आया है कि आपकी सरकार ने उ.प्र.में आठ नए यांत्रिक कत्लखाने स्थापित करने के लिए लायसेंस जारी कर दिए हैं. मुझे ऐसा लगता है कि आपको इन कत्लखानों के सम्बन्ध में तथ्यों की सही जानकारी नहीं दी गयी है अन्यथा आप कभी भी इस बात के लिए अपनी सहमति नहीं देतीं. इसलिए मैं आपके सामने अपनी बात रखना चाहता/चाहती हूँ:-
निर्दोष जानवरों के निर्मम कत्लेआम से ना तो आपकी सरकार को कोई आर्थिक लाभ होता है और न ही राज्य की आम जनता को; फायदा पहुँचता है तो सिर्फ और सिर्फ उस कंपनी/एजेंसी को जो कत्लखाना खोलना चाहती है. मैं यहाँ स्पष्ट करना चाहता हूँ कि आपकी सरकार यदि इन पशुओं के संरक्षण पर ध्यान दे तो राज्य को मांस निर्यात की तुलना में ५-१० गुना अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होंगे.
मांस निर्यात से आर्थिक लाभ की बेबुनियादी बातें मांस निर्यात करने वाली कंपनियों ने फैलाई है. आप चाहें तो इसके लिए केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन द्वारा जारी वर्ष २००९ के पशुधन से आय के स्रोत सम्बन्धी आंकड़ों का विश्लेषण करवा सकती है. (data released by Central Statistical Organisation, GOI, 2009) . मवेशी गाँवों में बसने वाले लोगों की जीवन-रेखा होते हैं, इन मवेशियों से दूध, ईंधन के लिए कंडे बनाने हेतु गोबर, खेती के लिए देसी खाद और खेती के लिए बैल, आवागमन, पर्यावरण आदि के संतुलन में सहायता मिलती है, जीवित पशु हर लिहाज से उपयोगी होते हैं. कत्लखाने हमारे पर्यावरण के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं, यह सभी जानते हैं. इस तथ्य को आज दुनियाभर के देश समझ चुके हैं इसलिए कई देशों में नए कत्लखाने खोलने पर रोक लगा दी गयी है.
यहाँ तक कि कई देशों में चालू कत्लखाने बंद किये जा रहे हैं क्योंकि दुनियाभर के लोग कत्लखानों से बढ़ती वैश्विक उष्णता (ग्लोबल वार्मिंग) के खतरे जान चुके है इसलिए इन देशों में शाकाहार को बढ़ावा दिया जा रहा है. और फिर हमारा देश भारत तो महात्मा बुद्ध, तीर्थंकर ऋषभदेव-महावीर, राम और कृष्ण जैसे महापुरुषों की जन्मभूमि हैं जिन्होंने सारे जग हो मैत्री और अहिंसा का सन्देश दिया. आप जानती हैं इन कत्लखानों के विरोध में २६ अप्रैल २०११ से बडौत, जिला बागपत में जैन मुनि श्री मैत्रिप्रभ सागरजी आमरण अनशन कर रहे हैं.
मैं जानता/जानती हूँ आप भारत की अहिंसा/जीवदया की संस्कृति और सभ्यता का बड़ा सम्मान करती हैं और साधुओं के प्रति भी आदर-भाव रखती हैं.
मैं आपसे समस्त अहिंसक समाज की ओर से निवेदन करता/करती हूँ कि आप पूरे मामले पर अविलम्ब ध्यान दें और संबंधित विभाग/मंत्री आदि से अपने फैसले पर पुनः विचार करने के लिए कहें और दिए गए लायसेंसों को तुरंत वापस लें. मुझे पूरा विश्वास है कि आपके इस फैसले से राज्य और सम्पूर्ण देश की जनता आपके समर्थन में खड़ी हो जाएगी और आम आदमी के मन में आपके प्रति सम्मान कई गुना बढ़ जाएगा.
भवदीय
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