श्री अर्जुन मुण्डा
मुख्यमंत्री
झारखंड सरकार
विषय : सभी 9 झारखंडी भाषाओं को द्वितीय राजभाषा घोषित करने के संबंध में।
जोहार!
झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा देश के किसी भी भाषा के प्रति कोई दुराग्रह या विद्वेष का भाव नहीं रखती है। लेकिन हमारा मानना है कि बांग्ला, मैथिली, भोजपुरी, उड़िया आदि किसी भी अन्य भाषा से पहले राजभाषा बनने के नैसर्गिक, संवैधानिक और पुरखा हक एवं अधिकार झारखंडी भाषाओं का है। बांग्ला और उड़िया तो वैसे भी पड़ोसी राज्यों में राजभाषाएं हैं। इसलिए किसी भी दूसरी भाषा को झारखंड में राजभाषा बनाने का मतलब है झारखंडी जनता केे साथ विश्वासघात। झारखंड आंदोलन के शहीदों की अवमानना।
झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा की मांग है कि -
1. झारखण्ड के सभी 9 आदिवासी एवं क्षेत्रीय भाषाओं (हो, मुंडारी, कुड़ुख, संताली, खड़िया, नागपुरी, खोरठा, पंचपरगनिया और कुरमाली) को संविधान के भाषाई संरक्षण के प्रावधानों तथा संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत सरकार द्वारा लिये गये संकल्प के आधार पर अविलंब द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान किया जाए।
2. केन्द्रीय झारखण्डी भाषा-साहित्य अकादमी का गठन किया जाए जिससे कि आदिवासी एवं क्षेत्रीय भाषा-साहित्य का संरक्षण व विकास हो सके, झारखंडी लेखकों को समुचित सम्मान एवं आर्थिक मदद मिल सके, पुरानी और नई पांडुलिपियों व अप्राप्य पुस्तकों का प्रकाशन हो सके।
3. विलुप्ति के कगार पर खड़े आदिम आदिवासियों (बिरहोर, असुर, मल्तो आदि) के भाषायी संरक्षण एवं विकास के लिए अलग से निकाय गठित हो ताकि उनके संरक्षण के विशेष प्रयास शुरू किया जा सके।
4. आदिवासी एवं क्षेत्रीय भाषाओं के प्रकाशन को प्रोत्साहन एवं वित्तीय समर्थन प्रदान करने के लिए विज्ञापन नीति बनाई जाए तथा नीति बनने तक सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को अनिवार्यतः विज्ञापन उपलब्ध कराने हेतु विभागीय स्तर पर तत्काल दिशा-निर्देश जारी किया जाए।
5. ‘आदिवासी’ एवं ‘होड़ संवाद’ पत्रिकाओं का नियमित मासिक प्रकाशन अविलंब शुरू किया जाए।
आपसे और आपकी सरकार से आग्रह है कि इस मानसून सत्र के दौरान सदन में इस संबंध में प्रस्ताव लाया जाए और सभी 9 झारखंडी भाषाओं को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान किया जाए.
भवदीय